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Tuesday, January 3, 2012
Friday, December 30, 2011
Tuesday, December 20, 2011
माँ
मेरी माँ के आँचल की एक बात बड़ी ही प्यारी है
जब सर रखकर सो जाता हूँ तो याद नहीं कुछ रहता है
अल्लाह के सजदे में झुकना
बिल्कुल माँ के आँचल में सोने जैसा है !!
उसकी दुआ का रंग कोई धो नही सकता
ममता का बीज कोई और बो नही सकता
रहमान हो , सुलतान हो , भगवान् हो भला
माँ से बड़ा, माँ से अच्छा कोई हो नही सकता !!
जब सर रखकर सो जाता हूँ तो याद नहीं कुछ रहता है
अल्लाह के सजदे में झुकना
बिल्कुल माँ के आँचल में सोने जैसा है !!
उसकी दुआ का रंग कोई धो नही सकता
ममता का बीज कोई और बो नही सकता
रहमान हो , सुलतान हो , भगवान् हो भला
माँ से बड़ा, माँ से अच्छा कोई हो नही सकता !!
Sunday, December 11, 2011
कोई हसीं ख़्वाब ढूंढते हैं
दर्द भरी ज़िन्दगी का सुराग ढूंढते हैं
है अँधेरा बहुत यहाँ एक चिराग ढूंढते हैं
बनाये थे तमाशा ज़िन्दगी को इस तरह
के उन मेहेरबानो का इलाज ढूंढते हैं
कोई इन अंधेरों में मेरी दिल की शमा जला दे
हम अपनी बदनसीबी का राज़ ढूंढते हैं
हसरत का आईना ये पत्थर दिल से टूट गया
शीशों के इन टुकड़ों में अपना आज ढूंढते हैं
माज़ी के तल्ख़ लम्हों ने हमें झुलस के रख दिया
दिल को भुलाने के लिए कोई हसीं ख़्वाब ढूंढते हैं !!
है अँधेरा बहुत यहाँ एक चिराग ढूंढते हैं
बनाये थे तमाशा ज़िन्दगी को इस तरह
के उन मेहेरबानो का इलाज ढूंढते हैं
कोई इन अंधेरों में मेरी दिल की शमा जला दे
हम अपनी बदनसीबी का राज़ ढूंढते हैं
हसरत का आईना ये पत्थर दिल से टूट गया
शीशों के इन टुकड़ों में अपना आज ढूंढते हैं
माज़ी के तल्ख़ लम्हों ने हमें झुलस के रख दिया
दिल को भुलाने के लिए कोई हसीं ख़्वाब ढूंढते हैं !!
Friday, December 9, 2011
मेरे होंठ मत सी
मेरे होंठ मत सी ,
मुझे इज़हार का मौका दे दे ..
इश्क जुर्म है तो इक़रार का मौका दे दे ..
आँखों आँखों ही में कह लूँगा जो कहना है मुझे ..
एक पल के लिए दीदार का मौका दे दे ..
कर ले क़ुबूल मेरी ख़ामोश मोहब्बत ..
या सर-ए-आम मुझे प्यार का मौका दे दे ..
ख़त्म कर दे दर-ओ-दीवार की हर पाबन्दियाँ ..
अब मुझे पहलू में आने का मौका दे दे ..
जीत जाना मेरा शायद तुझे बर्दाश्त न हो ..
खेल ऐसा कोई खेल के मुझे हार का मौका दे दे !!
मुझे इज़हार का मौका दे दे ..
इश्क जुर्म है तो इक़रार का मौका दे दे ..
आँखों आँखों ही में कह लूँगा जो कहना है मुझे ..
एक पल के लिए दीदार का मौका दे दे ..
कर ले क़ुबूल मेरी ख़ामोश मोहब्बत ..
या सर-ए-आम मुझे प्यार का मौका दे दे ..
ख़त्म कर दे दर-ओ-दीवार की हर पाबन्दियाँ ..
अब मुझे पहलू में आने का मौका दे दे ..
जीत जाना मेरा शायद तुझे बर्दाश्त न हो ..
खेल ऐसा कोई खेल के मुझे हार का मौका दे दे !!
ये प्यारा सा जो रिश्ता है
ये प्यारा सा जो रिश्ता है ,
कुछ मेरा है , कुछ तेरा है ,
कहीं लिखा नहीं , कहीं पढ़ा नहीं ,
कहीं देखा नहीं , कहीं सुना नहीं ,
फिर भी जाना पहचाना है ,
कुछ मेरा है , कुछ तेरा है ,
कुछ मासूम सा , कुछ अलबेला ,
कुछ अपना , कुछ बेगाना ,
कुछ चंचल सा , कुछ शर्मीला ,
कुछ शोख़ सा , कुछ संजीदा ,
कुछ उलझा हुवा , कुछ सुलझा हुवा ,
कुछ मस्ती भरा , कुछ खफ़ा खफ़ा ,
कुछ मेरा है , कुछ तेरा है ,
ये प्यारा सा जो रिश्ता है ....!! ♥ !!
कुछ मेरा है , कुछ तेरा है ,
कहीं लिखा नहीं , कहीं पढ़ा नहीं ,
कहीं देखा नहीं , कहीं सुना नहीं ,
फिर भी जाना पहचाना है ,
कुछ मेरा है , कुछ तेरा है ,
कुछ मासूम सा , कुछ अलबेला ,
कुछ अपना , कुछ बेगाना ,
कुछ चंचल सा , कुछ शर्मीला ,
कुछ शोख़ सा , कुछ संजीदा ,
कुछ उलझा हुवा , कुछ सुलझा हुवा ,
कुछ मस्ती भरा , कुछ खफ़ा खफ़ा ,
कुछ मेरा है , कुछ तेरा है ,
ये प्यारा सा जो रिश्ता है ....!! ♥ !!
Thursday, December 8, 2011
इस ख़वाहिश पे भी पहरेदार बैठे हैं
कुछ लोग सितम करने को तय्यार बैठे है
कुछ लोग मगर हम पे दिल हार बैठे हैं
इस कशमकश में पहचाने नहीं जाते
कहाँ दुश्मन और कहाँ दोस्त, यार बैठे हैं
इश्क को आग का दरिया ही समझ लीजिये हज़ूर !
कोई इस पार, तो कोई उस पार बैठे हैं
कौन कहता है, कि इस शहर में सारे है बेवफ़ा
हमारे सामने वफ़ादार, दो चार बैठे हैं
कल तक जिन्हें हसरत थी हमें बर्बाद करने की
आज वही लोग, अपने किये पे शर्मसार बैठे हैं
दुनिया से रूठ जाने की खवाहिश है हमारी
क्या करूँ, इस ख़वाहिश पे भी पहरेदार बैठे हैं !!
कुछ लोग मगर हम पे दिल हार बैठे हैं
इस कशमकश में पहचाने नहीं जाते
कहाँ दुश्मन और कहाँ दोस्त, यार बैठे हैं
इश्क को आग का दरिया ही समझ लीजिये हज़ूर !
कोई इस पार, तो कोई उस पार बैठे हैं
कौन कहता है, कि इस शहर में सारे है बेवफ़ा
हमारे सामने वफ़ादार, दो चार बैठे हैं
कल तक जिन्हें हसरत थी हमें बर्बाद करने की
आज वही लोग, अपने किये पे शर्मसार बैठे हैं
दुनिया से रूठ जाने की खवाहिश है हमारी
क्या करूँ, इस ख़वाहिश पे भी पहरेदार बैठे हैं !!
Tuesday, December 6, 2011
किसी अजनबी की बातें
कभी रात भर के झगड़े कभी चाहतों की बातें,
वही आप ही के किस्से वही आप ही की बातें,
वो मिला है मुझको अक्सर सर-ए-राह चलते चलते,
वही अजनबी निगाहें वही बेरुख़ी की बातें,
न समझ सका जहां मैं कोई मेरा दर्द यारों,
मेरे ग़म को लोग समझे मेरी शायरी की बातें,
कोई हमको ये बताये ये जुनून नहीं तो क्या है ..?
मिले जब भी हम किसी से करें आप ही की बातें,
मेरे हाल पर वो यारों कुछ ऐसे मुस्कुराये,
के वो सुन रहे हों जैसे किसी अजनबी की बातें !!
वही आप ही के किस्से वही आप ही की बातें,
वो मिला है मुझको अक्सर सर-ए-राह चलते चलते,
वही अजनबी निगाहें वही बेरुख़ी की बातें,
न समझ सका जहां मैं कोई मेरा दर्द यारों,
मेरे ग़म को लोग समझे मेरी शायरी की बातें,
कोई हमको ये बताये ये जुनून नहीं तो क्या है ..?
मिले जब भी हम किसी से करें आप ही की बातें,
मेरे हाल पर वो यारों कुछ ऐसे मुस्कुराये,
के वो सुन रहे हों जैसे किसी अजनबी की बातें !!
Sunday, December 4, 2011
नफ़रत का गुमान होता है
वो जाते जाते कह गया हम सिर्फ तुम्हारे ख्वाबों मैं आएंगे
कोई कह दे उनसे वो वादा तो करे हम ज़िन्दगी भर के लिए सो जाएंगे...!
मेरे दिल की उम्मीदो का होंसला तो देखो
मुझे इंतजार उस का है जिसे मेरा एहसास तक नहीं ...!
बे- रूखी हि सही मगर सोते हुए कुछ तो कह दिया करो
चुपके से सो जाते हो नफ़रत का गुमान होता है...!
Saturday, December 3, 2011
दूर हो के रह भी नहीं सकते
न तुझे छोड़ सकते हैं, तेरे हो भी नहीं सकते,
ये कैसी बेबसी है आज, हम रो भी नहीं सकते !
ये कैसा दर्द है , पल - पल हमें तडपाये रखता है,
तुम्हारी याद आती है तो फिर, सो भी नहीं सकते !
छुपा सकते हैं, और न दिखा सकते हैं लोगों को,
कुछ ऐसे दाग़ हैं दिल पर, जो हम धो भी नहीं सकते !
कहा तो था छोड़ देंगे तुम को , फिर रुक गए लेकिन,
तुम्हें पा तो नहीं सकते, मगर छोड़ भी नहीं सकते !
हमारा एक होना भी , नहीं मुमकिन रहा अब तो,
जियें कैसे, कि तुम से दूर हो के रह भी नहीं सकते !!
Friday, December 2, 2011
सारा ज़माना चाहिए था
हुआ जो कुछ, भुलाना चाहिए था
उसे अब लौट आना चाहिए था,
ये सारा बोझ मेरे सर पे क्यूँ है?
उसे भी ग़म उठाना चाहिए था
क्यूँ चुप चाप ही तालुक़ तोड़ दिया
उसे पहले बताना चाहिए था,
उसी की याद की ख़ुशबू है दिल में
मुझे जिस को भुलाना चाहिए था,
ज़रा ग़लती पे मुझ से रूठ बता
उसे क्या बस ….!!!! बहाना चाहिए था,
मुझे पा कर उसे क्या चैन मिलता !
जिसे सारा ज़माना चाहिए था..!!!
उसे अब लौट आना चाहिए था,
ये सारा बोझ मेरे सर पे क्यूँ है?
उसे भी ग़म उठाना चाहिए था
क्यूँ चुप चाप ही तालुक़ तोड़ दिया
उसे पहले बताना चाहिए था,
उसी की याद की ख़ुशबू है दिल में
मुझे जिस को भुलाना चाहिए था,
ज़रा ग़लती पे मुझ से रूठ बता
उसे क्या बस ….!!!! बहाना चाहिए था,
मुझे पा कर उसे क्या चैन मिलता !
जिसे सारा ज़माना चाहिए था..!!!
Thursday, December 1, 2011
यूँ हो भी सकता है
यक़ीन आता नहीं दिल को कि ऐसा हो भी सकता है,
हमारा हाल-ए-ग़म सुनकर वो ज़ालिम रो भी सकता है,
कभी इन्सान अकेला हो के भी तन्हा नहीं होता,
सर-ए-महफ़िल कभी बैठे बिठाये खो भी सकता है,
ताज़ुब क्यों है तुमको हमारी बे-गुनाही पर,
कर्म का एक क़तर दाग़े-ए-दामन धो भी सकता है,
कभी इन्सान को नींद आती नहीं फूलों के बिस्तर पर,
कभी पत्थर पे सर रख कर मज़े से सो भी सकता है,
वो कहते हैं तेरी ख़ातिर सितारे तोड़ लायेंगे,
बा-ज़ाहिर यूँ नहीं होता मग़र यूँ हो भी सकता है !!
~♥ kalp ♥~
हमारा हाल-ए-ग़म सुनकर वो ज़ालिम रो भी सकता है,
कभी इन्सान अकेला हो के भी तन्हा नहीं होता,
सर-ए-महफ़िल कभी बैठे बिठाये खो भी सकता है,
ताज़ुब क्यों है तुमको हमारी बे-गुनाही पर,
कर्म का एक क़तर दाग़े-ए-दामन धो भी सकता है,
कभी इन्सान को नींद आती नहीं फूलों के बिस्तर पर,
कभी पत्थर पे सर रख कर मज़े से सो भी सकता है,
वो कहते हैं तेरी ख़ातिर सितारे तोड़ लायेंगे,
बा-ज़ाहिर यूँ नहीं होता मग़र यूँ हो भी सकता है !!
~♥ kalp ♥~
ज़रूरत नहीं मुझे
जब तू साथ है तो किसी की ज़रूरत नहीं मुझे
हर तरफ अँधेरा है पर रौशनी की ज़रूरत नहीं मुझे,
कोई रहता है हर वक़्त ख्यालों में इस तरह
के ख़वाब देखने की ज़रूरत नहीं मुझे,
एक दोस्त है जो बाँट लेता है हर दुःख मेरा
हर किसी को अपना ग़म बताने की ज़रूरत नहीं मुझे,
उसकी हर बात लाजवाब है मेरे लिए
उसकी तारीफ़ करने की ज़रूरत नहीं मुझे,
उसकी आँखों की कशिश कहीं जाने नहीं देती मुझे
उसके इलावा किसी को अपना बनाने की ज़रूरत नहीं मुझे !!
हर तरफ अँधेरा है पर रौशनी की ज़रूरत नहीं मुझे,
कोई रहता है हर वक़्त ख्यालों में इस तरह
के ख़वाब देखने की ज़रूरत नहीं मुझे,
एक दोस्त है जो बाँट लेता है हर दुःख मेरा
हर किसी को अपना ग़म बताने की ज़रूरत नहीं मुझे,
उसकी हर बात लाजवाब है मेरे लिए
उसकी तारीफ़ करने की ज़रूरत नहीं मुझे,
उसकी आँखों की कशिश कहीं जाने नहीं देती मुझे
उसके इलावा किसी को अपना बनाने की ज़रूरत नहीं मुझे !!
तुझे देखने के बाद
हर शख्स दीवाना है तुझे देखने के बाद
दावा मेरा सही है तुझे देखने के बाद,
आये हैं तेरे शहर में तो लौट के न जाएँगे
ये फैसला किया है तुझे देखने के बाद,
सजदा तुझे करूँगा तो काफ़िर कहेंगे लोग
ये कौन सोचता है तुझे देखने के बाद,
कहते हैं तुझे लोग मसीहा, मगर यहाँ
एक शख्स मर गया है तुझे देखने के बाद,
सजदा तुझे करूँ के नक्श-ए-क़दम चूमती राहों
घर काबा बन गया है तुझे देखने के बाद,
रहता हूँ खोया खोया अब हर वक़्त
ये हाल हो गया है तुझे देखने के बाद !!
~♥ kalp ♥~
दावा मेरा सही है तुझे देखने के बाद,
आये हैं तेरे शहर में तो लौट के न जाएँगे
ये फैसला किया है तुझे देखने के बाद,
सजदा तुझे करूँगा तो काफ़िर कहेंगे लोग
ये कौन सोचता है तुझे देखने के बाद,
कहते हैं तुझे लोग मसीहा, मगर यहाँ
एक शख्स मर गया है तुझे देखने के बाद,
सजदा तुझे करूँ के नक्श-ए-क़दम चूमती राहों
घर काबा बन गया है तुझे देखने के बाद,
रहता हूँ खोया खोया अब हर वक़्त
ये हाल हो गया है तुझे देखने के बाद !!
~♥ kalp ♥~
Wednesday, November 30, 2011
तेरी याद
कभी हमें हँसा जाती है,
कभी रुलाती है ..... तेरी याद !
कभी तन्हाई में महफ़िल सजाती है,
कभी महफ़िल में तन्हा कर जाती है .... तेरी याद !
कभी तेरे होने का यकीन दिलाती है
कभी तेरी कमी का एहसास जगाती है
कभी मेरे ख़्वाबो को सजाती है
कभी हकीक़त से रूबरू करवाती है
कभी ख़ुशी की वजह बनजाती है
कभी ग़म का सबब होती है
कभी तेरा प्यार ले आती है
कभी मेरी जान लेजाती है
कभी दिलको सुकून देजाती है
कभी बहुत तडपाती है
अब आजाओ के बहुत आती है ---तेरी याद !!
Tuesday, November 29, 2011
लेकिन कभी रोया नहीं
ग़म की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नहीं
तू ने मुझको खो दिया , मैंने तुझे खोया नहीं
नींद का हल्का गुलाबी सा ख़ुमार आंखों में था
यूँ लगा जैसे वो शब् को देर तक सोया नहीं
हर तरफ दीवार- ओ - दर और उनमें आँखों का हुजूम
कह सके जो दिल की हालत वो लब- ए- गोया नहीं
जुर्म आदम ने किया और नस्ल- ए- आदम को सज़ा
काटता हूँ ज़िन्दगी भर मैंने जो बोया नहीं
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी ‘ मुनीर ’
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं !!
तू ने मुझको खो दिया , मैंने तुझे खोया नहीं
नींद का हल्का गुलाबी सा ख़ुमार आंखों में था
यूँ लगा जैसे वो शब् को देर तक सोया नहीं
हर तरफ दीवार- ओ - दर और उनमें आँखों का हुजूम
कह सके जो दिल की हालत वो लब- ए- गोया नहीं
जुर्म आदम ने किया और नस्ल- ए- आदम को सज़ा
काटता हूँ ज़िन्दगी भर मैंने जो बोया नहीं
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी ‘ मुनीर ’
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं !!
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